नर्मदापुरम। नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम के अतिक्रमण प्रभारी सुनील राजपूत एक बार फिर विवादों में हैं। व्यापारियों ने सुनील राजपूत पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर नर्मदापुरम को लिखित शिकायत की है। शिकायतकर्ता कपिल यादव ने 6 अक्टूबर को लिखित शिकायत देकर लेख किया है कि सुनील राजपूत ने 30 तारीख को बिना किसी पूर्व सूचना या अनाउंसमेंट के उनकी दुकान यादव ट्रेडर्स से लगभग 8,000 रुपये का सामान उठाया गया। जिसकी न कोई जब्ती पंचनामा बनाया गया और ना ही कोई वैधानिक सूचना दी गई। जब शिकायतकर्ता कपिल यादव ने सीएमओ से संपर्क किया, तो उनके द्वारा बताया गया कि कार्रवाई सिटी मजिस्ट्रेट के निर्देश में की गई थी। शिकायतकर्ता ने अपने पत्र में जिला कलेक्टर से अनुरोध किया है कि उनका जब्त सामान वापस कराया जाए और इस द्वेषपूर्ण की गई कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की जाए। कपिल यादव ने शिकायत आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि नगर में रेल्वे स्टेशन रोड, बस स्टैंड, टैक्सी स्टैंड, अमर चौक, इब्राहिम चौक और इंदिरा गांधी चौक जैसे मुख्य क्षेत्रों में खुलेआम अतिक्रमण फैला हुआ है, परंतु वहां कोई कार्रवाई नहीं होती। इसके विपरीत, छोटी दुकानों और गरीब वर्ग के ठेलों को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है।लेकिन सवाल यह है कि अगर कार्रवाई विधिसम्मत थी, तो सिर्फ एक दुकान पर ही क्यों? बाकी दुकानों पर वही अतिक्रमण आज भी वही है।
सुनील राजपूत का आरोपों से है पुराना नाता
सुनील राजपूत पर कई बार पैसे लेने, पक्षपात पूर्ण कार्यवाही करने के आरोप लग चुके है। इससे पूर्व में विवेकानंद घाट के पास चाय के ठेलेवाले से पैसे लेने के आरोप लग चुके हैं। जिसके बाद विवेकानंद घाट के सामने चाय का ठेला नहीं हटाया गया। वही सुनील राजपूत पर प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी को लेकर सिटी कोतवाली में एफ आई आर दर्ज हुई थी साथ ही सुनील राजपूत को काम पर से भी हटा दिया था। उक्त प्रकरण न्यायालय में लंबित है। उच्च न्यायालय जबलपुर से भी सुनील राजपूत को कोई विशेष राहत नहीं मिली थी लेकिन अधिकारियों से सामंजस्य बैठाकर दोबारा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अतिक्रमण प्रभारी के पद पर सुनील राजपूत को नियम विरुद्ध तरीके से पदस्थ किया गया है।
वही नगर में यह चर्चा है कि नगर पालिका की कार्यवाहियों में पारदर्शिता नहीं दिख रही। जहां राजनीतिक या व्यक्तिगत सुविधा होती है, वहां फौरन बुलडोज़र, और जहां प्रभावशाली नाम होते हैं, वहां फाइल तक नहीं हिलती।